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अपने

अपने जब दूर जाते है


तो


बहुत दर्द देते है


पर


अपने जब पास रह कर


भी


दूरिया बना लेते है


तो


दिल में एक कसक


छोड़ जाते है



फासला

कभी कभी
चंद कदमो का फासला
दुनिया बदल देता है

चंद कदमो का फासला
ज़िन्दगी-भर का फासला बन जाता है

चंद कदमो का फासला
कभी ना मिटने वाला फासला बन जाता है

चंद कदमो का फासला
जिंदगी ओर मौत का फासला बन जाता है






चाँद

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दबे कदमो से
सब से छुपते छुपाते
आज चाँद उतर आया मेरे आँगन ।
सुना था कि,
चाँद में दाग होता है ।
हां ,दाग तो था , पर,
वो उसकी खूबसूरती को ओर भी बढा  रहा था।
मैं उसकी आभा में ऐसी खोई,
कि एकटक उसे निहारती ही रही
जाने कब तक ।
जब होश आया तो, उससे कुछ कहना चाहा
पर,
उसके जाने का समय हो गया था ।
वो बिना कुछ कहे,
बिना कुछ सुने,
बस अपना दीदार करा कर चला गया

कुछ लकीरे

कल्पना की लकीरों से, तेरी एक तस्वीर बनाई है
जब भी देखती हूँ उसमे, तेरा ही अक्स नज़र आता है
किसी का उदास चेहरा उस, अजनबी फ़रिश्ते से देखा नही जाता
किसी कि भी आँखों में आंसू देख ,मदद को दोडा वो आता है


हर तरफ़ आग ही आग, मचा हाहाकार है
ऐसे माहौल में तू ,कैसे आराम फरमाता है
कल जब ये आग, तेरे घर तक पहुंच जायेगी
तब ही शायद जलन की पीड़ा को जान पायेगा


एक दिन  वो रब, सब ठीक कर देगा
ऐसी बातें कह कर तू, क्यों ख़ुद को बरगलाता  है
ख़ुद- ब -ख़ुद कुछ भी ठीक नही होता है
उस रब ने ये काम हमारे ही जिम्मे  छोडा है


वक्त

वो वक्त जैसे बीत कर भी नही बिता

मेरे आज में शामिल है वो कुछ इस तरह



कहते है वक्त से पहले किसी को कुछ नही मिलता

जाने वो वक्त कब आएगा

उस वक्त के इंतज़ार में तो उमर गुजर गई



वक्त इंसान को क्या से क्या बना देता है

कल तक जो नही देते थे जवाब

आज वो पूछते है हाल

आदत

तन्हाई  की ऐसी आदत  हो गई है


कि महफ़िल  से डर लगता है


किसी के जाने  से तो  कभी ना डरे


पर किसी के आने की आहट से भी डर लगता है

सरकार की स्वप्न निद्रा

सरकार सोती रही
मीठे सपने में खोई रही
आंतकी धमाके करते रहे पर
वो स्वप्न निद्रा से न जागी
खुफिया एजेंसिया कान में
जोर जोर से चिल्लाती  रही
देश को खतरा है ,ये बताती रही
जयपुर गुजरात ,बंगलुरु ,दिल्ली में
धमाके होते रहे
पर सरकार नही जागी
उसके कान में तो जू तक न रेंगी
वो जागी तो कब ?
जब लोकसभा चुनावों में 6 महीने का वक्त था बाकी
जब मुंबई में हो गए थे युद्ध जैसे हालात
ऐसे समय में उसे अपनी कुर्सी डोलती नज़र आई
फिर अफरा तफरी में उसने ढेर सारे फैसले कर डाले
इस्तीफों की राजनीति कर दी  गई
आरोप परत्यारोप का दौर शुर हो गया
सरकार के लिए फैसलों का हश्र क्या होगा
सरकार की ये फुर्ती कब तक कायम रहती है
ये तो वक्त ही बताएगा
पर जो जिंदगिया बेवक्त इस दुनिया से चली गई
सरकार उनके परिवारों को क्या जवाब देगी

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