तुम साथ हो तो सब अच्छा लगता है
अंधेरे मे भी रोशनी का रंग दिखता है
हो के जुदा तुमसे ये चाँद भी हमे दर्द देता है
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तुम साथ हो तो सब अच्छा लगता है
अंधेरे मे भी रोशनी का रंग दिखता है
हो के जुदा तुमसे ये चाँद भी हमे दर्द देता है
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तु कया लूटेगा उन लूटे हूओ को
जो पहले ही वकत के हाथो लूटे है ।
तोड़ सकी जिस ना मुश्किलें हजार
आज वो अपनों के हाथो ही टूटे है ।
कब तक हर दुःख को अपने दामन मे समेटू
आज ये दामन मुझसे छूटे है ।
ये रिश्ते ही थे मेरा सारा संसार
आज इस संसार मे मेरा दम घुटे है ।
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ना जा उनके मुहलले मे उनकी गिलयाँ तंग हो गई है
छोड के अपनी जमीं वो भी हमारे संग हो गई है
इधर उधर नजरे ना जाने कया ढूढँती है
तुमहे सामने पा के ये दंग हो गई है
आसमान पे सतरंगी सपनो की घटाएँ छाई है
लगता है जैसे सारी दुिनया एकरंग हो गई है
बन िततली खुले गगन मे वो उड जाएँगी
कह दो जमाने को वो कटी पतंग हो गई है
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चोखट पर नजरे लगाए बैठे थे, इंतज़ार मे नजरे बिछाये बैठे थे
दरवाजे पर कोई दस्तक हुई , पर क्या ये तुम हो ।
सपनों मे रोज़ मिलते थे तुमसे ,दूर जाकर भी तुम दूर हो न पाए
दर पर मेरे खड़ा है कोई ,पर क्या यह तुम हो ।
नजर आती है चिथडो मे लिपटी काया , मुख पर सलवटे हजार
तुम तो ऐसे न थे ,पर क्या यह तुम हो ।
बरसों न जाने कहां रहे ,इक बार मेरी सुध तक न ली
मेरी सुध लेने आया हैं जो ,पर क्या ये तुम हो ।
छोड़ गए थे मुझे ,जाने किस आसरे
लौट कर आए जो तुम ,पर क्या ये तुम हो ।
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िकतने अचछे थे बचपन के वो पल
ना कोई िचंता, ना कोई काम
बेिफकरी का था आलम
हर वकत इधर- उधर खूब उधम मचाते
अपनी छोटी -छोटी शरारतो मे,लडाइयो मे उलझे रहते
बडो की लडाइयो से थे अंजान
हर इक से करते थे पयार
ना चाह थी दौलत की
ना चाह थी नाम की
खुद मे ही थे मसत
बडी बातो की ना थी समझ
छोटी-छोटी बातो से खुश हो जाते थे
छोटी-छोटी बातो पर रो भी दे थे
िकतने अचछे थे बचपन के वो पल
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