िदल मे दबी बात कभी
िकसी से कह ही नही पाए
कभी लफजो ने साथ नही िदया
तो कभी िदल ने इजाजत नही दी
िदल की बात िदल
मे ही दब कर रह गई
पर कलम हाथ मे आते ही
” कुछ िदल से ” बनकर पननो पे उतर गई
April 8, 2008 by kmuskan
िदल मे दबी बात कभी
िकसी से कह ही नही पाए
कभी लफजो ने साथ नही िदया
तो कभी िदल ने इजाजत नही दी
िदल की बात िदल
मे ही दब कर रह गई
पर कलम हाथ मे आते ही
” कुछ िदल से ” बनकर पननो पे उतर गई
suswagatam,aapke blog par anna bahut achhi anubhuti rahi.