Posted in muskan, tagged hindi, kala, kavita, muskan, parichay, poetry on April 10, 2008 | 1 Comment »
आप लोगो से पिरचय कराता है जो वो नाम है मुसकान कभी सचची कभी खोखली कभी तारो सी चमकती कभी आंसुओ मे भीगी पर हूँ तो मुसकान ही कभी एकदम आसान कभी जरा भी ना समझ मे आने वाली पर रहूंगी तो मुसकान ही
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