लमहा लमहा
बुनकर बनती है िजंदगी
लमहा- लमहा
बदलती है िजंदगी
हर लमहा
अपने साथ कुछ लेकर आता है
कुछ खुिशँया कुछ गम
हर लमहा
अपने पीछे कुछ यादे छोड जाता है
कुछ खटटी कुछ मीठी
हर लमहा
हमे कुछ देती है िजंदगी
कुछ वादे कुछ नाते
हर लमहा
कुछ कहती है िजंदगी
हर लमहे
मे िकतना कुछ समेटे है िजंदगी
इन लमहो
को जी लो जीभरकर
यही िसखाती है िजंदगी
जाने कल हो ना हो


bahut sundar kavita hai.