िजंदगी की इक ही है आरजू
हर जनम मे बनू, मै तेरी आरजू
मेरी तो िदल की हर धडकन मे बसे हो तुम
तेरे िदल मे थोडी सी जगह की है आरजू
मेरे िदल की हर चाहत हो तुम
मेरी िदल की हर आस हो तुम
खुली आखो से देखा जो, वो खवाब हो तुम
तेरे खवाबो मे बस जाऊ,ं बस यही हैआरजू
हो कर जुदा तुमसे, इक पल भी जी ना पाएगे
मरकर भी चैन, कहाँ हम पाएगे
तुझसे जनमो का नाता है
हर जनम तेरा साथ रहे, बस यही है आरजू


nice poetry,
keep it up
शुकिरया
यहाँ आने का और मेरा उतसाह बढाने का।