बीती बातो की मत पूिछए
जुबाँ पर आएँ तोॆ दरद देतीहै।
दरद से अपना पुराना नाता है
िदल का ददॆ आखॊ से बयाँ हो जाता है।
आखो की भी अपनी भाषा होती है
समझने की कोिशश तो कीिजए।
कहने से कया होता हैएक बार
इस दरद को िदल से महसूस करके तो देिखए ।
April 14, 2008 by kmuskan
बीती बातो की मत पूिछए
जुबाँ पर आएँ तोॆ दरद देतीहै।
दरद से अपना पुराना नाता है
िदल का ददॆ आखॊ से बयाँ हो जाता है।
आखो की भी अपनी भाषा होती है
समझने की कोिशश तो कीिजए।
कहने से कया होता हैएक बार
इस दरद को िदल से महसूस करके तो देिखए ।