टूटकर िबखरने को थी िजंदगी मेरी,
िक समेटने को मुझे तुम आ गए ।
धडकने िदल का साथ छोडने को थी,
िक इन धडकनो को रफतार देने को तुम आ गए ।
िदलो िदमाग मे इक जंग िछडी थी
भंवर मे फँसी थी नैया मेरी
िक पार लगाने मेरी नैया को तुम आ गए ।
इंतजार करते- करते थक गई थी आखे [...]
Archive for April 15th, 2008
तुम आ गए
Posted in tum, tagged Blogroll, hindi poetry, kala, kavita, muskan, tum on April 15, 2008 | Leave a Comment »

