टूटकर िबखरने को थी िजंदगी मेरी,
िक समेटने को मुझे तुम आ गए ।
धडकने िदल का साथ छोडने को थी,
िक इन धडकनो को रफतार देने को तुम आ गए ।
िदलो िदमाग मे इक जंग िछडी थी
भंवर मे फँसी थी नैया मेरी
िक पार लगाने मेरी नैया को तुम आ गए ।
इंतजार करते- करते थक गई थी आखे मेरी
हवाओ के रूख से आशा दीप बुझने को था
िक मेरी आशाओ को पंख देने को तुम आ गए ।

