आ अब लौट चले
िफर से उंही राहो पे
िजन पर कभी सफर िकया था
अतीत के गिलयारो मे ।
आज िफर इक मंिजल की तलाश है
इक नयी सुबह का इंतजार है
राह वही ह, मंिजल नयी है
मै वही हूँ, तुम वही हो
कारवाँ नया है ।
तुम साथ हो तो
हर सफर आसान हो जाएँगा
हर रासता छोटा हो जाएँगा
हर मंिजल [...]
Archive for April 16th, 2008
आ अब लौट चले
Posted in tum, tagged Blogroll, hindi poetry, kala, kavita, muskan, tum on April 16, 2008 | Leave a Comment »

