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Archive for April 17th, 2008

खवाब

हर घडी ये िदल कोई नया खवाब बुनता है
हर खवाब मे तुमहारा ही चेहरा िदखता है।
मेरी हालत पे हँसते है दुिनया वाले
ये चाँद भी उनके संग हो जाता है ।
अपने हर खवाब को समेट िलया है
इनहे इक बार जी लेने को जी चाहता है।
नही भूले अपना कोई भी खवाब
ना जाने कब कौन सा खवाब [...]

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