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Archive for April 26th, 2008

िजंदगी

हाथो से वकत िफसल गया
हम बस देखते ही रह गए।
िजंदगी ने िकए िकतने िसतम
हम सब सह गए।
िदल की बात जुबाँ पर कभी आ ना सकी
हम आखो से ही सब कह गए।
खुद से ही बोीझल इन आखो को बंद िकया
तो आखो से आसूँ बह गए।
बडे जतनो से संजोया िजन सपनो को
एक ही झोके मे वे बह [...]

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