हम तो आए थे आपसे, हाल ए िदल बयाँ करने
पर बातो ही बातो मे , गजल बन गई ।
जो िदल मे था, जबाँ से सब कह िदया
और शबदो ही शबदो मे, गजलबन गई ।
तुम िबना कुछ कहे, बस देखते ही रह गए
हमने आखो से आखो को िमलाया तो, गजल बन गई ।
तुमहारे कुछ कहे िबना, ये गजल अधूरी थी
पर जब तुमने कािफये से कािफये को िमलाया तो ,गजल बन गई ।


bahut badhiya ji,ankhon se hi gazal bana li,sundar