इक पल मे कितना कुछ बदल जाता है
पैसा कैसे सब रिश्तो को तोड़ देता है
आज जान पाई हूँ
पागल थी मैं जो इन रिश्तो को अपना मान बैठी थी
पागल थी मैं जो इन पर अपना सब कुछ वार बैठी थी
सोचती थी मेरे सुख दुःख के साथी है
हर दुःख मे मुझको थाम लेंगे
पर गलत थी मैं
वो तो [...]
Archive for May, 2008
रिश्ेते
Posted in zindagi, tagged पल, रिश्ेते, Blogroll, hindi, kala, kavita, muskan, poetry, zindagi on May 22, 2008 | 6 Comments »
मुझे जाने दो
Posted in zindagi, tagged छाँव, दिल, मुस्कान, Blogroll, hindi, kavita, muskan, zindagi on May 19, 2008 | 4 Comments »
मेरे होठो की मुस्कान देखकर
गर वो समझते है की मैं खुश हूँ
तो उन्हें इसी
गलतफहमी मे खुश होने दो
कल उजड़ जाएगा मेरा ये आशिअना
जाने फ़िर कहाँ बसेरा पाऊँगी
कम से कम आज की रात
तो मुझे चैन से सोने दो
दिल का गुबार आंखो से
आंसू बन बह निकला है
कोई न रोको इसे
आज जी भर के रोने दो [...]
झलक
Posted in khawab, tagged ख्वाब, झलक, नैना kala, Blogroll, muskan, tum, zindagi on May 17, 2008 | 1 Comment »
तेरी इक नजर को तरसे है ये नैना
पर तू ना जाने कहाँ गुम है।
ख्वाबो मे इक झलक दिखलाकर
फिर से ना जाने कहाँ गुम है।
तुझसे ना दूर होंगे ऐसा तेरा वादा था
पर हर वादा भूलकर तू ना जाने कहाँ गुम है ।
चाँद
Posted in tum, tagged muskan, hindi, kala, चाँद, रंग, तुम, रोशनी on May 15, 2008 | Leave a Comment »
तुम साथ हो तो सब अच्छा लगता है
अंधेरे मे भी रोशनी का रंग दिखता है
हो के जुदा तुमसे ये चाँद भी हमे दर्द देता है
रिश्ते
Posted in zindagi, tagged दामन, रिश्ते, वकत, Blogroll, hindi poetry, kavita, muskan, zindagi on May 12, 2008 | 3 Comments »
तु कया लूटेगा उन लूटे हूओ को
जो पहले ही वकत के हाथो लूटे है ।
तोड़ सकी जिस ना मुश्किलें हजार
आज वो अपनों के हाथो ही टूटे है ।
कब तक हर दुःख को अपने दामन मे समेटू
आज ये दामन मुझसे छूटे है ।
ये रिश्ते ही थे मेरा सारा संसार
आज इस संसार मे मेरा दम [...]

