िकतने अचछे थे बचपन के वो पल
ना कोई िचंता, ना कोई काम
बेिफकरी का था आलम
हर वकत इधर- उधर खूब उधम मचाते
अपनी छोटी -छोटी शरारतो मे,लडाइयो मे उलझे रहते
बडो की लडाइयो से थे अंजान
हर इक से करते थे पयार
ना चाह थी दौलत की
ना चाह थी नाम की
खुद मे ही थे मसत
बडी बातो की ना [...]
Archive for May 5th, 2008
बचपन
Posted in zindagi, tagged पल, बचपन, Blogroll, hindi poetry, kala, kavita, muskan on May 5, 2008 | 3 Comments »

