चोखट पर नजरे लगाए बैठे थे, इंतज़ार मे नजरे बिछाये बैठे थे
दरवाजे पर कोई दस्तक हुई , पर क्या ये तुम हो ।
सपनों मे रोज़ मिलते थे तुमसे ,दूर जाकर भी तुम दूर हो न पाए
दर पर मेरे खड़ा है कोई ,पर क्या यह तुम हो ।
नजर आती है चिथडो मे लिपटी काया , [...]
Archive for May 7th, 2008
क्या ये तुम हो
Posted in tum, tagged Blogroll, hindi poetry, kala, kavita, muskan, tum on May 7, 2008 | 3 Comments »

