ना जा उनके मुहलले मे उनकी गिलयाँ तंग हो गई है
छोड के अपनी जमीं वो भी हमारे संग हो गई है
इधर उधर नजरे ना जाने कया ढूढँती है
तुमहे सामने पा के ये दंग हो गई है
आसमान पे सतरंगी सपनो की घटाएँ छाई है
लगता है जैसे सारी दुिनया एकरंग हो गई है
बन िततली खुले गगन मे [...]
Archive for May 10th, 2008
कटी पतंग हो गई है
Posted in zindagi, tagged आसमान, कटी पतंग, Blogroll, hindi poetry, kala, kavita, muskan on May 10, 2008 | 1 Comment »

