इक पल मे कितना कुछ बदल जाता है
पैसा कैसे सब रिश्तो को तोड़ देता है
आज जान पाई हूँ
पागल थी मैं जो इन रिश्तो को अपना मान बैठी थी
पागल थी मैं जो इन पर अपना सब कुछ वार बैठी थी
सोचती थी मेरे सुख दुःख के साथी है
हर दुःख मे मुझको थाम लेंगे
पर गलत थी मैं
वो तो [...]
Archive for May 22nd, 2008
रिश्ेते
Posted in zindagi, tagged पल, रिश्ेते, Blogroll, hindi, kala, kavita, muskan, poetry, zindagi on May 22, 2008 | 6 Comments »

