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Archive for June, 2008

जी भरकर जी ले इस पल को
जाने फिर ये पल हो न हो
हर खुशी को समेट ले अपनी बाहों में
जाने फिर ये पल हो न हो
गम की काली रात है बीती
सुबह का सूरज खुशियों का सवेरा लाया है
जी ले इन खुशियों को
जाने फिर ये पल हो न हो
कुदरत का नियम है रात के बाद
दिन को [...]

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ना जाने कया सोचकर
िदल की बातो को
कागज पर उतार िदया।
पर अगले ही पल
ना जाने कयू
कागज फाड िदया।
काश िजंदगी के साथ भी
ऐसा िकया जा सकता।
िकसी बेकार पनने को
िजंदगी की िकताब से फाडा जा सकता ।

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नही खुशियों की कतार मंजूर ,नही रौशनी की सोगात मंजूर
क्योंकि आज मेरा चाँद बादलो में छिपा है
नही गमो की बात मंजूर ,नही तारो भरी रात मंजूर
क्योंकि आज मेरा चाँद बादलो में छिपा है
नही उमीदो का आसमान मंजूर ,नही भीड़ भरा कारवा मंजूर
क्योंकि आज मेरा चाँद बादलो में छिपा है
नही उसके बिन कोई पल मंजूर , [...]

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गीता आज एक ऐसे दोराहे पर खडी थी जहाँ उसे समझ नही आ रहा है िक वो कया करे ,कहाँ जाए िकससे अपने िदल की बात कहे।
उसकी माँ ने उसे बचपन से यही िसखाया था िक एक औरत का अपना घर उसका ससुराल होता है । मायके मे तो वो बस कुछ िदनो की मेहमान [...]

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इक औरत की िजंदगी गुजर जाती ह,ै मुिशकलो से जुझने मे
कभी अपने हक के िलए तो, कभी अपने आसिततव के िलए
कभी अपने िलए तो, कभी अपनो के िलए।
बचपन से जवानी, जवानी से
बुढापा जुझती रहती है औरत
कभी- कभी तो इस दुिनया म,े
आने से पहले ही िवदा कर दी जाती है
जो खुशनसीब, दुिनया मे आ जाती है
वो [...]

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