बहुत दिनों तक दिल्ली से बाहर रही इसलिए कुछ लिख नही पाई लेकिन अब फिर से दिल्ली मे हूँ इसलिए कुछ पंक्तिया लिख रही हूँ
तेरे दर पे आई हूँ ,ले के फिरयाद
तू तो जानता हैं ,क्या हैं मेरी मुराद
मेरे दिल की कोई बात ,तुझसे कहाँ छुपी है
पूरी कर दे आज , [...]
Archive for June 10th, 2008
कुछ पंक्तिया
Posted in zindagi, tagged अपना, फिरयाद, मेरी मुराद, सहारा, Blogroll, hindi, kala, muskan, poetry, zindagi on June 10, 2008 | 4 Comments »

