जी भरकर जी ले इस पल को
जाने फिर ये पल हो न हो
हर खुशी को समेट ले अपनी बाहों में
जाने फिर ये पल हो न हो
गम की काली रात है बीती
सुबह का सूरज खुशियों का सवेरा लाया है
जी ले इन खुशियों को
जाने फिर ये पल हो न हो
कुदरत का नियम है रात के बाद
दिन को [...]
Archive for June 30th, 2008
पल
Posted in zindagi, tagged कुदरत, पल, सूरज, Blogroll, hindi, kala, kavita, muskan, poetry, zindagi on June 30, 2008 | 3 Comments »

