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Archive for July 15th, 2008

जब आंखो मे सपने थे ,अरमान थे

तो तुम्हे तब भी एतराज था

आज जब हर सपना ,हर अरमान मर चुका है

तो तुम्हे अब भी एतराज है

तुम्हे ये हक किसने कब दिया

आज मुझे तुम्हारे इस हक पे एतराज है

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