जब आंखो मे सपने थे ,अरमान थे
तो तुम्हे तब भी एतराज था
आज जब हर सपना ,हर अरमान मर चुका है
तो तुम्हे अब भी एतराज है
तुम्हे ये हक किसने कब दिया
आज मुझे तुम्हारे इस हक पे एतराज है
Posted in tum, tagged अरमान, एतराज, Blogroll, hindi, kala, kavita, muskan, poetry, tum, zindagi on July 15, 2008 | 3 Comments »
जब आंखो मे सपने थे ,अरमान थे
तो तुम्हे तब भी एतराज था
आज जब हर सपना ,हर अरमान मर चुका है
तो तुम्हे अब भी एतराज है
तुम्हे ये हक किसने कब दिया
आज मुझे तुम्हारे इस हक पे एतराज है