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Archive for December, 2008

दबे कदमो से सब से छुपते छुपाते आज चाँद उतर आया मेरे आँगन । सुना था कि,चाँद में दाग होता है । हां ,दाग तो था , पर, वो उसकी खूबसूरती को ओर भी बढा  रहा था। मैं उसकी आभा में ऐसी खोई, कि एकटक उसे निहारती ही रही जाने कब तक । जब [...]

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कल्पना की लकीरों से, तेरी एक तस्वीर बनाई है
जब भी देखती हूँ उसमे, तेरा ही अक्स नज़र आता है
किसी का उदास चेहरा उस, अजनबी फ़रिश्ते से देखा नही जाता
किसी कि भी आँखों में आंसू देख ,मदद को दोडा वो आता है

हर तरफ़ आग ही आग, मचा हाहाकार है
ऐसे माहौल में तू ,कैसे आराम फरमाता [...]

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वो वक्त जैसे बीत कर भी नही बिता
मेरे आज में शामिल है वो कुछ इस तरह

कहते है वक्त से पहले किसी को कुछ नही मिलता
जाने वो वक्त कब आएगा
उस वक्त के इंतज़ार में तो उमर गुजर गई

वक्त इंसान को क्या से क्या बना देता है
कल तक जो नही देते थे [...]

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तन्हाई  की ऐसी आदत  हो गई है

कि महफ़िल  से डर लगता है

किसी के जाने  से तो  कभी ना डरे

पर किसी के आने की आहट से भी डर लगता है

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सरकार सोती रही मीठे सपने में खोई रही आंतकी धमाके करते रहे पर वो स्वप्न निद्रा से न जागी खुफिया एजेंसिया कान में जोर जोर से चिल्लाती  रही देश को खतरा है ,ये बताती रही जयपुर गुजरात ,बंगलुरु ,दिल्ली में धमाके होते रहे पर सरकार नही जागी उसके कान में तो जू तक [...]

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