तन्हाई की ऐसी आदत हो गई है
कि महफ़िल से डर लगता है
किसी के जाने से तो कभी ना डरे
पर किसी के आने की आहट से भी डर लगता है
Posted in zindagi, tagged आदत, आहट .महफ़िल, डर, तन्हाई, िजंदगी, Blogroll, hindi, hindi poetry, kala, muskan, zindagi on December 12, 2008 | 5 Comments »
तन्हाई की ऐसी आदत हो गई है
कि महफ़िल से डर लगता है
किसी के जाने से तो कभी ना डरे
पर किसी के आने की आहट से भी डर लगता है