दबे कदमो से सब से छुपते छुपाते आज चाँद उतर आया मेरे आँगन । सुना था कि,चाँद में दाग होता है । हां ,दाग तो था , पर, वो उसकी खूबसूरती को ओर भी बढा रहा था। मैं उसकी आभा में ऐसी खोई, कि एकटक उसे निहारती ही रही जाने कब तक । जब [...]
Posted in kavita,kala, tagged आभा, खूबसूरती, चाँद, जिंदगी, दाग, दीदार, समय, होश, Blogroll, hindi, kala, kavita, muskan, poetry, zindagi on December 29, 2008 | 6 Comments »
दबे कदमो से सब से छुपते छुपाते आज चाँद उतर आया मेरे आँगन । सुना था कि,चाँद में दाग होता है । हां ,दाग तो था , पर, वो उसकी खूबसूरती को ओर भी बढा रहा था। मैं उसकी आभा में ऐसी खोई, कि एकटक उसे निहारती ही रही जाने कब तक । जब [...]