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Archive for the ‘Uncategorized’ Category

सरकार सोती रही मीठे सपने में खोई रही आंतकी धमाके करते रहे पर वो स्वप्न निद्रा से न जागी खुफिया एजेंसिया कान में जोर जोर से चिल्लाती  रही देश को खतरा है ,ये बताती रही जयपुर गुजरात ,बंगलुरु ,दिल्ली में धमाके होते रहे पर सरकार नही जागी उसके कान में तो जू तक [...]

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कभी कभी ये सोचती हूँ कि क्या आंतकवादी इंसान नही होते अगर होते है तो क्यों उनकी आत्मा उन्हें धिक्कारती  नही है……….जब वो निर्दोषों का लहू बहाते है क्यों उनकी आत्मा उनसे ये नही पूछती कि ………. वो मासूम जिंदगियों को क्यों तबाह कर रहे है सड़क पे पड़े मांस के चीथडो [...]

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वो फूल ही कया जिसमे खुशबू ना हो

वो दिल ही कया जिसमे किसी का पयार न हो

वो पयार ही कया जिसमे दरद ना हो

वो दरद ही कया जिसमे साथ ना हो

वो साथ ही कया जिसमे अहसास ना हो

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आज मेरा चाँद उदास है
दुनिया से अनजान
अपने ही ख्यालो में उलझा है
जानती हूँ उसकी उलझन
पर उसे सुलझाना मेरे बसमें नही
मैंने कहा उससे तुम यू उदास न रहा करो
तुम्हारे उदास होने से
आसमान का चाँद भी उदास हो जाता है
तारे टिमटिमाना छोड़ देते है
पूर्णिमा की रात भी अमावस सी लगाती है
और ………
मेरे चाँद ने अपनी चुप्पी तोड़ते [...]

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िकस िकस से बचाए अपना दामन
हर मोड पे लुटने को हजार बैठे है।
पुजी जाती थी कल तक जहाँ
आज वहीं बोली लगाने को तैयार बैठे है।

िजसके िलए छोडी सारी दुिनया
वही उसे बाजार मे सजाए बैठे है।
िजन पे थी सुरकशा की िजममेदारी
वही उसे बेचने को तैयार बैठे है।

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