Posted in zindagi, tagged अक्स, अजनबी, आंसू, आग, उदास, ज़िन्दगी, तस्वीर, पीड़ा, फ़रिश्ते, रब, लकीरे, Blogroll, hindi poetry, kala, kavita, muskan, poetry, zindagi on December 23, 2008 | 8 Comments »
कल्पना की लकीरों से, तेरी एक तस्वीर बनाई है
जब भी देखती हूँ उसमे, तेरा ही अक्स नज़र आता है
किसी का उदास चेहरा उस, अजनबी फ़रिश्ते से देखा नही जाता
किसी कि भी आँखों में आंसू देख ,मदद को दोडा वो आता है
हर तरफ़ आग ही आग, मचा हाहाकार है
ऐसे माहौल में तू ,कैसे आराम फरमाता [...]
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Posted in zindagi, tagged kavita, muskan, zindagi, hindi, poetry, kala, Blogroll, घर, नफरत, बाज़ार, ज़िन्दगी, आग, घाव, सवाल, जवाब .., चोट, जिस्म, मुआवजा on September 18, 2008 | 6 Comments »
फ़िर से लग गई है दुकाने
फ़िर से सज गए है बाज़ार
दिल्ली फ़िर अपनी रफ़्तार से चल पड़ी है
धमाके के मंजर को भूल ज़िन्दगी फ़िर पटरी पे आ गई है
पर वो कैसे भूल पायेंगे ……..
जिसके घर के चिराग इस नफरत की आग में जल गए
वो कैसे भूल पायेंगे ……………
जिसने अपने जिस्म पे उन घावो को झेला [...]
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