आज मेरा चाँद उदास है
दुनिया से अनजान
अपने ही ख्यालो में उलझा है
जानती हूँ उसकी उलझन
पर उसे सुलझाना मेरे बसमें नही
मैंने कहा उससे तुम यू उदास न रहा करो
तुम्हारे उदास होने से
आसमान का चाँद भी उदास हो जाता है
तारे टिमटिमाना छोड़ देते है
पूर्णिमा की रात भी अमावस सी लगाती है
और ………
मेरे चाँद ने अपनी चुप्पी तोड़ते [...]
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उदास चाँद
Posted in Uncategorized, tagged kavita, muskan, zindagi, hindi, poetry, kala, Blogroll, आसमान, चाँद, उदास, अनजान, पूर्णिमा on July 5, 2008 | 1 Comment »
क्योंकि आज मेरा चाँद बादलो में छिपा है
Posted in zindagi, tagged kavita, muskan, hindi, Blogroll, पल, आसमान, चाँद, कारवा, दिन on June 19, 2008 | 2 Comments »
नही खुशियों की कतार मंजूर ,नही रौशनी की सोगात मंजूर
क्योंकि आज मेरा चाँद बादलो में छिपा है
नही गमो की बात मंजूर ,नही तारो भरी रात मंजूर
क्योंकि आज मेरा चाँद बादलो में छिपा है
नही उमीदो का आसमान मंजूर ,नही भीड़ भरा कारवा मंजूर
क्योंकि आज मेरा चाँद बादलो में छिपा है
नही उसके बिन कोई पल मंजूर , [...]
कटी पतंग हो गई है
Posted in zindagi, tagged kavita, muskan, kala, Blogroll, hindi poetry, कटी पतंग, आसमान on May 10, 2008 | 1 Comment »
ना जा उनके मुहलले मे उनकी गिलयाँ तंग हो गई है
छोड के अपनी जमीं वो भी हमारे संग हो गई है
इधर उधर नजरे ना जाने कया ढूढँती है
तुमहे सामने पा के ये दंग हो गई है
आसमान पे सतरंगी सपनो की घटाएँ छाई है
लगता है जैसे सारी दुिनया एकरंग हो गई है
बन िततली खुले गगन मे [...]

