Posted in zindagi, tagged अक्स, अजनबी, आंसू, आग, उदास, ज़िन्दगी, तस्वीर, पीड़ा, फ़रिश्ते, रब, लकीरे, Blogroll, hindi poetry, kala, kavita, muskan, poetry, zindagi on December 23, 2008 | 8 Comments »
कल्पना की लकीरों से, तेरी एक तस्वीर बनाई है
जब भी देखती हूँ उसमे, तेरा ही अक्स नज़र आता है
किसी का उदास चेहरा उस, अजनबी फ़रिश्ते से देखा नही जाता
किसी कि भी आँखों में आंसू देख ,मदद को दोडा वो आता है
हर तरफ़ आग ही आग, मचा हाहाकार है
ऐसे माहौल में तू ,कैसे आराम फरमाता [...]
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Posted in zindagi, tagged आँख, आंसू, उदास, ज़िन्दगी, दिल, सपना, सुंदर, Blogroll, hindi, kala, kavita, muskan, poetry, zindagi on November 26, 2008 | 3 Comments »
इक सपना टूटा
आँख से आंसू बहा
कुछ देर तक दिल बेचैन रहा
उदास रहा
पर
फिर जैसे
ख़ुद-ब-खुद सब ठीक हो गया
इन आँखों ने फिर इक नया सपना बुना
पहले से भी सुंदर
सपनो का टूटना ,
बिखरना,
जुड़ना ,
टूट कर फ़िर से जुड़ना
यही तो ज़िन्दगी है
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Posted in Uncategorized, tagged अनजान, आसमान, उदास, चाँद, पूर्णिमा, Blogroll, hindi, kala, kavita, muskan, poetry, zindagi on July 5, 2008 | 1 Comment »
आज मेरा चाँद उदास है
दुनिया से अनजान
अपने ही ख्यालो में उलझा है
जानती हूँ उसकी उलझन
पर उसे सुलझाना मेरे बसमें नही
मैंने कहा उससे तुम यू उदास न रहा करो
तुम्हारे उदास होने से
आसमान का चाँद भी उदास हो जाता है
तारे टिमटिमाना छोड़ देते है
पूर्णिमा की रात भी अमावस सी लगाती है
और ………
मेरे चाँद ने अपनी चुप्पी तोड़ते [...]
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