गीता आज एक ऐसे दोराहे पर खडी थी जहाँ उसे समझ नही आ रहा है िक वो कया करे ,कहाँ जाए िकससे अपने िदल की बात कहे।
उसकी माँ ने उसे बचपन से यही िसखाया था िक एक औरत का अपना घर उसका ससुराल होता है । मायके मे तो वो बस कुछ िदनो की मेहमान [...]
Posts Tagged ‘औरत’
अपना घर
Posted in kahani, tagged अपना घर, औरत, Blogroll, hindi, kahani, muskan, zindagi on June 16, 2008 | 3 Comments »
औरत की िजंदगी
Posted in zindagi, tagged औरत, छाँव, बचपन, िजंदगी, Blogroll, hindi, kala, kavita, muskan, poetry on June 12, 2008 | 8 Comments »
इक औरत की िजंदगी गुजर जाती ह,ै मुिशकलो से जुझने मे
कभी अपने हक के िलए तो, कभी अपने आसिततव के िलए
कभी अपने िलए तो, कभी अपनो के िलए।
बचपन से जवानी, जवानी से
बुढापा जुझती रहती है औरत
कभी- कभी तो इस दुिनया म,े
आने से पहले ही िवदा कर दी जाती है
जो खुशनसीब, दुिनया मे आ जाती है
वो [...]

