Posted in zindagi, tagged कोशिश, खवाब, ज़िन्दगी, तम्मना, धारा, पल, Blogroll, hindi, kala, kavita, muskan, poetry, zindagi on November 18, 2008 | 2 Comments »
ज़िन्दगी जाने तू क्या चाहती है
जाने किस मोड़ पे मुझे लिए जा रही है
मेरे खवाबो ,मेरी तम्मनाओ को
पीछे छोड़ जाने किस और चली जा रही है
जाने कयों तु मेरी हर कोशिश को
नाकाम करने में लगी है
मुझसे तेरी जाने क्या दुश्मनी है
कुछ पल तो मुझे चैन के लेने दे
तू क्या चाहती है ,मैं नही [...]
Read Full Post »
Posted in zindagi, tagged खवाब, चाँद, जिंदगी, फासला, हकीकत, Blogroll, hindi, kala, kavita, muskan, poetry, zindagi on July 23, 2008 | 3 Comments »
खवाबो में चाँद को देखा था
उसे पाया भी था
पर हकीकत में
कभी उसे पाने की तमन्ना नही की
मैं खवाब और हकीकत के बीच का फासला जानती हूँ
जिंदगी में कुछ खवाब सच हो जाते है
पर हकीकत से
नजरे चुराकर देखे गए खवाब कभी सच होते नही
मैं खवाब और हकीकत के बीच का फासला जानती हूँ
Read Full Post »