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Posts Tagged ‘चाँद’

दबे कदमो से सब से छुपते छुपाते आज चाँद उतर आया मेरे आँगन । सुना था कि,चाँद में दाग होता है । हां ,दाग तो था , पर, वो उसकी खूबसूरती को ओर भी बढा  रहा था। मैं उसकी आभा में ऐसी खोई, कि एकटक उसे निहारती ही रही जाने कब तक । जब [...]

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ज़िंदगी की भाग-दोड में जाने वो पल कहाँ खो गए

जब कुछ पल बैठ कर चैन से बतिया लिया करते थे

एक चाए के प्याले संग

जाने वो पल कहाँ खो गए

जब सावन की पहली बारिश

तन और मन दोनों को भिगो जाती थी

जाने वो पल कहाँ खो गए

जब कितने ही पल डूबते सूरज को निहारते बीत जाते [...]

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खवाबो में चाँद को देखा था

उसे पाया भी था

पर हकीकत में

कभी उसे पाने की तमन्ना नही की

मैं खवाब और हकीकत के बीच का फासला जानती हूँ

जिंदगी में कुछ खवाब सच हो जाते है

पर हकीकत से

नजरे चुराकर देखे गए खवाब कभी सच होते नही

मैं खवाब और हकीकत के बीच का फासला जानती हूँ

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आज मेरा चाँद उदास है
दुनिया से अनजान
अपने ही ख्यालो में उलझा है
जानती हूँ उसकी उलझन
पर उसे सुलझाना मेरे बसमें नही
मैंने कहा उससे तुम यू उदास न रहा करो
तुम्हारे उदास होने से
आसमान का चाँद भी उदास हो जाता है
तारे टिमटिमाना छोड़ देते है
पूर्णिमा की रात भी अमावस सी लगाती है
और ………
मेरे चाँद ने अपनी चुप्पी तोड़ते [...]

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नही खुशियों की कतार मंजूर ,नही रौशनी की सोगात मंजूर
क्योंकि आज मेरा चाँद बादलो में छिपा है
नही गमो की बात मंजूर ,नही तारो भरी रात मंजूर
क्योंकि आज मेरा चाँद बादलो में छिपा है
नही उमीदो का आसमान मंजूर ,नही भीड़ भरा कारवा मंजूर
क्योंकि आज मेरा चाँद बादलो में छिपा है
नही उसके बिन कोई पल मंजूर , [...]

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