वो वक्त जैसे बीत कर भी नही बिता
मेरे आज में शामिल है वो कुछ इस तरह
कहते है वक्त से पहले किसी को कुछ नही मिलता
जाने वो वक्त कब आएगा
उस वक्त के इंतज़ार में तो उमर गुजर गई
वक्त इंसान को क्या से क्या बना देता है
कल तक जो नही देते थे [...]
Posted in zindagi, tagged इंतज़ार, उमर, जवाब .., जिंदगी, वक्त, Blogroll, hindi, hindi poetry, kala, kavita, muskan, poetry, zindagi on December 18, 2008 | 4 Comments »
वो वक्त जैसे बीत कर भी नही बिता
मेरे आज में शामिल है वो कुछ इस तरह
कहते है वक्त से पहले किसी को कुछ नही मिलता
जाने वो वक्त कब आएगा
उस वक्त के इंतज़ार में तो उमर गुजर गई
वक्त इंसान को क्या से क्या बना देता है
कल तक जो नही देते थे [...]
Posted in zindagi, tagged आग, घर, घाव, चोट, जवाब .., ज़िन्दगी, जिस्म, नफरत, बाज़ार, मुआवजा, सवाल, Blogroll, hindi, kala, kavita, muskan, poetry, zindagi on September 18, 2008 | 6 Comments »
फ़िर से लग गई है दुकाने
फ़िर से सज गए है बाज़ार
दिल्ली फ़िर अपनी रफ़्तार से चल पड़ी है
धमाके के मंजर को भूल ज़िन्दगी फ़िर पटरी पे आ गई है
पर वो कैसे भूल पायेंगे ……..
जिसके घर के चिराग इस नफरत की आग में जल गए
वो कैसे भूल पायेंगे ……………
जिसने अपने जिस्म पे उन घावो को झेला [...]