कभी कभी
चंद कदमो का फासला
दुनिया बदल देता है
चंद कदमो का फासला
ज़िन्दगी-भर का फासला बन जाता है
चंद कदमो का फासला
कभी ना मिटने वाला फासला बन जाता है
चंद कदमो का फासला
जिंदगी ओर मौत का फासला बन जाता है
ै
Posted in zindagi, tagged कभी कभी, चंद कदम, जिंदगी, दुनिया, फासला, मौत, Blogroll, hindi, kala, kavita, muskan, zindagi on January 30, 2009 | 4 Comments »
कभी कभी
चंद कदमो का फासला
दुनिया बदल देता है
चंद कदमो का फासला
ज़िन्दगी-भर का फासला बन जाता है
चंद कदमो का फासला
कभी ना मिटने वाला फासला बन जाता है
चंद कदमो का फासला
जिंदगी ओर मौत का फासला बन जाता है
ै
Posted in kavita,kala, tagged आभा, खूबसूरती, चाँद, जिंदगी, दाग, दीदार, समय, होश, Blogroll, hindi, kala, kavita, muskan, poetry, zindagi on December 29, 2008 | 6 Comments »
दबे कदमो से सब से छुपते छुपाते आज चाँद उतर आया मेरे आँगन । सुना था कि,चाँद में दाग होता है । हां ,दाग तो था , पर, वो उसकी खूबसूरती को ओर भी बढा रहा था। मैं उसकी आभा में ऐसी खोई, कि एकटक उसे निहारती ही रही जाने कब तक । जब [...]
Posted in zindagi, tagged इंतज़ार, उमर, जवाब .., जिंदगी, वक्त, Blogroll, hindi, hindi poetry, kala, kavita, muskan, poetry, zindagi on December 18, 2008 | 4 Comments »
वो वक्त जैसे बीत कर भी नही बिता
मेरे आज में शामिल है वो कुछ इस तरह
कहते है वक्त से पहले किसी को कुछ नही मिलता
जाने वो वक्त कब आएगा
उस वक्त के इंतज़ार में तो उमर गुजर गई
वक्त इंसान को क्या से क्या बना देता है
कल तक जो नही देते थे [...]
Posted in zindagi, tagged इंतज़ार, उम्मीद, गम, जिंदगी, पल, पैमाना, लाश, शिकायत, Blogroll, hindi, kala, kavita, muskan, poetry, zindagi on September 5, 2008 | 3 Comments »
अपने ही कंधो पे ,अपनी लाश लिए जा रहे है
जाने किस , उम्मीद में जिए जा रहे है
जानती हूँ ,तू शामिल नही अब मेरी जिंदगी में
फिर भी तुझे याद किए जा रहे हैै
गलत राह पे पड़ते तेरे कदमो को, जब रोकना चाहा मैंने
तो तुम छोड़ के मुझे अकेला, मुझसे दूर, बहुत दूर चले गए
तेरे लोटने [...]
Posted in zindagi, tagged खवाब, चाँद, जिंदगी, फासला, हकीकत, Blogroll, hindi, kala, kavita, muskan, poetry, zindagi on July 23, 2008 | 3 Comments »
खवाबो में चाँद को देखा था
उसे पाया भी था
पर हकीकत में
कभी उसे पाने की तमन्ना नही की
मैं खवाब और हकीकत के बीच का फासला जानती हूँ
जिंदगी में कुछ खवाब सच हो जाते है
पर हकीकत से
नजरे चुराकर देखे गए खवाब कभी सच होते नही
मैं खवाब और हकीकत के बीच का फासला जानती हूँ