अपने जब दूर जाते है
तो
बहुत दर्द देते है
पर
अपने जब पास रह कर
भी
दूरिया बना लेते है
तो
दिल में एक कसक
छोड़ जाते हैै
Posted in apne, tagged अपने, आंसू, कसक, गम, ज़िन्दगी, दर्द, दिल, दूरिया, Blogroll, dard, dil, hindi, hindi poetry, kala, kavita, muskan, zindagi on February 5, 2009 | 3 Comments »
अपने जब दूर जाते है
तो
बहुत दर्द देते है
पर
अपने जब पास रह कर
भी
दूरिया बना लेते है
तो
दिल में एक कसक
छोड़ जाते हैै
Posted in zindagi, tagged आँख, आंसू, उदास, ज़िन्दगी, दिल, सपना, सुंदर, Blogroll, hindi, kala, kavita, muskan, poetry, zindagi on November 26, 2008 | 3 Comments »
इक सपना टूटा
आँख से आंसू बहा
कुछ देर तक दिल बेचैन रहा
उदास रहा
पर
फिर जैसे
ख़ुद-ब-खुद सब ठीक हो गया
इन आँखों ने फिर इक नया सपना बुना
पहले से भी सुंदर
सपनो का टूटना ,
बिखरना,
जुड़ना ,
टूट कर फ़िर से जुड़ना
यही तो ज़िन्दगी है
Posted in zindagi, tagged आंसू, कतरा, खुशी, गम, जज्बात, दिल, सपना, Blogroll, hindi, kala, kavita, muskan, poetry, zindagi on September 24, 2008 | 12 Comments »
कहने को तो पानी का एक कतरा है पर
कितने ही जज्बातों का दरिया है
हर सपने को बड़े प्यार से आँखों में छुपा रखा था
आँख से आंसू बन के बहा जो, वही टुटा हुआ इक सपना है
बिन कहे मेरे दिल के हर जज्बात को बयां कर जाते है
खुशी हो या गम हर दम [...]
Posted in Uncategorized, tagged आत्मा, इंसान, दिमाग, दिल, पत्थर, मकसद, मासूम, शरीर, सड़क, Blogroll, hindi, kala, kavita, muskan, poetry, zindagi on September 15, 2008 | 7 Comments »
कभी कभी ये सोचती हूँ कि क्या आंतकवादी इंसान नही होते अगर होते है तो क्यों उनकी आत्मा उन्हें धिक्कारती नही है……….जब वो निर्दोषों का लहू बहाते है क्यों उनकी आत्मा उनसे ये नही पूछती कि ………. वो मासूम जिंदगियों को क्यों तबाह कर रहे है सड़क पे पड़े मांस के चीथडो [...]
Posted in Uncategorized, tagged अहसास, खुशबू, दरद, दिल, पयार, फूल, Blogroll, hindi, kala, kavita, muskan, poetry, zindagi on September 11, 2008 | 3 Comments »
वो फूल ही कया जिसमे खुशबू ना हो
वो दिल ही कया जिसमे किसी का पयार न हो
वो पयार ही कया जिसमे दरद ना हो
वो दरद ही कया जिसमे साथ ना हो
वो साथ ही कया जिसमे अहसास ना हो