Posted in zindagi, tagged कोशिश, खवाब, ज़िन्दगी, तम्मना, धारा, पल, Blogroll, hindi, kala, kavita, muskan, poetry, zindagi on November 18, 2008 | 2 Comments »
ज़िन्दगी जाने तू क्या चाहती है
जाने किस मोड़ पे मुझे लिए जा रही है
मेरे खवाबो ,मेरी तम्मनाओ को
पीछे छोड़ जाने किस और चली जा रही है
जाने कयों तु मेरी हर कोशिश को
नाकाम करने में लगी है
मुझसे तेरी जाने क्या दुश्मनी है
कुछ पल तो मुझे चैन के लेने दे
तू क्या चाहती है ,मैं नही [...]
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Posted in zindagi, tagged इन्द्रधनुष, चाँद, चाए, चिंता, चैन, जीवन, दुनिया, पल, बारिश, भाग-दोड, मन, रंग, सावन, सूरज, ज़िंदगी, Blogroll, hindi, kala, kavita, muskan, poetry, zindagi on October 1, 2008 | 8 Comments »
ज़िंदगी की भाग-दोड में जाने वो पल कहाँ खो गए
जब कुछ पल बैठ कर चैन से बतिया लिया करते थे
एक चाए के प्याले संग
जाने वो पल कहाँ खो गए
जब सावन की पहली बारिश
तन और मन दोनों को भिगो जाती थी
जाने वो पल कहाँ खो गए
जब कितने ही पल डूबते सूरज को निहारते बीत जाते [...]
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Posted in zindagi, tagged इंतज़ार, उम्मीद, गम, जिंदगी, पल, पैमाना, लाश, शिकायत, Blogroll, hindi, kala, kavita, muskan, poetry, zindagi on September 5, 2008 | 3 Comments »
अपने ही कंधो पे ,अपनी लाश लिए जा रहे है
जाने किस , उम्मीद में जिए जा रहे है
जानती हूँ ,तू शामिल नही अब मेरी जिंदगी में
फिर भी तुझे याद किए जा रहे हैै
गलत राह पे पड़ते तेरे कदमो को, जब रोकना चाहा मैंने
तो तुम छोड़ के मुझे अकेला, मुझसे दूर, बहुत दूर चले गए
तेरे लोटने [...]
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Posted in tum, tagged नजारा, पल, Blogroll, hindi, kala, kavita, muskan, poetry, tum, zindagi on July 21, 2008 | 5 Comments »
दुनिया की भीड़ में खो गए, तुम कहाँ
हर पल नज़रे तुम्हे ही ढूंढती है
जानती है की तुम नही हो यहाँ, पर
फ़िर भी तुम्हारा ही नजारा ढूंढती है
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Posted in tum, tagged अगर, पल, सामना, Blogroll, hindi, kala, kavita, muskan, poetry, zindagi on July 18, 2008 | 4 Comments »
उस पल को बीते जमाना हो गया
जब हुआ था मेरा तुझसे सामना
आज अगर तुम मिल भी जाओ तो
हम दो अजनबियों की तरह
एक दूजे को बिना देखे ही गुजर जायंगे
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