Posted in zindagi, tagged इन्द्रधनुष, चाँद, चाए, चिंता, चैन, जीवन, दुनिया, पल, बारिश, भाग-दोड, मन, रंग, सावन, सूरज, ज़िंदगी, Blogroll, hindi, kala, kavita, muskan, poetry, zindagi on October 1, 2008 | 8 Comments »
ज़िंदगी की भाग-दोड में जाने वो पल कहाँ खो गए
जब कुछ पल बैठ कर चैन से बतिया लिया करते थे
एक चाए के प्याले संग
जाने वो पल कहाँ खो गए
जब सावन की पहली बारिश
तन और मन दोनों को भिगो जाती थी
जाने वो पल कहाँ खो गए
जब कितने ही पल डूबते सूरज को निहारते बीत जाते [...]
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Posted in कान्हा, tagged कान्हा, गीता, धरती, बर्ज, मटकी, माखन, रंग, श्याम, Blogroll, hindi, kala, kavita, muskan, poetry, zindagi on August 25, 2008 | 5 Comments »
आज फिर कान्हा धरती पर आएँगे
फिर लीला दिखलाएँगे
फिर मटकी तोड़ के माखन चुराएंगे
आज फिर कान्हा धरती पर आएँगे
फिर गोपियों संग
यमुना तीर पर रास रचायेंगे
आज फिर बर्ज श्याम रंग में रंग जाएगा
आज फिर कान्हा धरती पर आएँगे
फिर गीता की वाणी गूंजेगी
फिर भटको को राह दिखायेगे
आज फिर कान्हा धरती पर आएँगे
मेरे कान्हा आज फिर धरती पर [...]
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Posted in tum, tagged चाँद, तुम, रंग, रोशनी, hindi, kala, muskan on May 15, 2008 | Leave a Comment »
तुम साथ हो तो सब अच्छा लगता है
अंधेरे मे भी रोशनी का रंग दिखता है
हो के जुदा तुमसे ये चाँद भी हमे दर्द देता है
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