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Posts Tagged ‘रंग’

ज़िंदगी की भाग-दोड में जाने वो पल कहाँ खो गए

जब कुछ पल बैठ कर चैन से बतिया लिया करते थे

एक चाए के प्याले संग

जाने वो पल कहाँ खो गए

जब सावन की पहली बारिश

तन और मन दोनों को भिगो जाती थी

जाने वो पल कहाँ खो गए

जब कितने ही पल डूबते सूरज को निहारते बीत जाते [...]

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आज फिर कान्हा धरती पर आएँगे

फिर लीला दिखलाएँगे

फिर मटकी तोड़ के माखन चुराएंगे

आज फिर कान्हा धरती पर आएँगे

फिर गोपियों संग

यमुना तीर पर रास रचायेंगे

आज फिर बर्ज श्याम रंग में रंग जाएगा

आज फिर कान्हा धरती पर आएँगे

फिर गीता की वाणी गूंजेगी

फिर भटको को राह दिखायेगे

आज फिर कान्हा धरती पर आएँगे

मेरे कान्हा आज फिर धरती पर [...]

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तुम साथ हो तो सब अच्छा लगता है
अंधेरे मे भी रोशनी का रंग दिखता है
हो के जुदा तुमसे ये चाँद भी हमे दर्द देता है

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