हम तो आए थे आपसे, हाल ए िदल बयाँ करने
पर बातो ही बातो मे , गजल बन गई ।
जो िदल मे था, जबाँ से सब कह िदया
और शबदो ही शबदो मे, गजलबन गई ।
तुम िबना कुछ कहे, बस देखते ही रह गए
हमने आखो से आखो को िमलाया तो, गजल बन गई ।
तुमहारे कुछ कहे [...]
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गजल बन गई
Posted in tum, tagged Blogroll, dil, gajal, kafiya, kala, kavita, muskan, tum on April 28, 2008 | 1 Comment »

