हर घडी ये िदल कोई नया खवाब बुनता है
हर खवाब मे तुमहारा ही चेहरा िदखता है।
मेरी हालत पे हँसते है दुिनया वाले
ये चाँद भी उनके संग हो जाता है ।
अपने हर खवाब को समेट िलया है
इनहे इक बार जी लेने को जी चाहता है।
नही भूले अपना कोई भी खवाब
ना जाने कब कौन सा खवाब [...]
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खवाब
Posted in khawab, tagged Blogroll, hindi poetry, kala, kavita, khawab, muskan, zindagi on April 17, 2008 | 5 Comments »

