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Archive for the ‘Uncategorized’ Category

सरकार सोती रही
मीठे सपने में खोई रही
आंतकी धमाके करते रहे पर
वो स्वप्न निद्रा से न जागी
खुफिया एजेंसिया कान में
जोर जोर से चिल्लाती  रही
देश को खतरा है ,ये बताती रही
जयपुर गुजरात ,बंगलुरु ,दिल्ली में
धमाके होते रहे
पर सरकार नही जागी
उसके कान में तो जू तक न रेंगी
वो जागी तो कब ?
जब लोकसभा चुनावों में 6 महीने का वक्त था बाकी
जब मुंबई में हो गए थे युद्ध जैसे हालात
ऐसे समय में उसे अपनी कुर्सी डोलती नज़र आई
फिर अफरा तफरी में उसने ढेर सारे फैसले कर डाले
इस्तीफों की राजनीति कर दी  गई
आरोप परत्यारोप का दौर शुर हो गया
सरकार के लिए फैसलों का हश्र क्या होगा
सरकार की ये फुर्ती कब तक कायम रहती है
ये तो वक्त ही बताएगा
पर जो जिंदगिया बेवक्त इस दुनिया से चली गई
सरकार उनके परिवारों को क्या जवाब देगी

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कभी कभी ये सोचती हूँ कि
क्या आंतकवादी इंसान नही होते
अगर होते है तो
क्यों उनकी आत्मा उन्हें धिक्कारती  नही है……….जब वो निर्दोषों का लहू बहाते है
क्यों उनकी आत्मा उनसे ये नही पूछती कि ………. वो मासूम जिंदगियों को क्यों तबाह कर रहे है
सड़क पे पड़े मांस के चीथडो को देखके भी वो कैसे चैन से सो पाते है
कहीं उनके शरीर में दिल की जगह पत्थर तो नही है
हाँ ,ऐसा ही होगा
तभी तो किसी की चीखो से उनका दिल नही पसीजता
ऐसा ही है
तभी तो किसी की बर्बादी में उन्हें अपना मकसद पूरा होता दिखता है
शायद उनके पास दिमाग भी नही होता ……….
तभी वो ये नही समझ पाते आख़िर वो क्या कर रहे है
जो आग आज वो दूसरो के घर में लगा रहे है
उससे वो भी नही बच पाएंगे
हाँ ,शायद वो इंसान नही होते ……………
जिसके पास दिल,दिमाग और आत्मा ना हो वो इंसान हो भी कैसे सकता है

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वो फूल ही कया जिसमे खुशबू ना हो

वो दिल ही कया जिसमे किसी का पयार न हो

वो पयार ही कया जिसमे दरद ना हो

वो दरद ही कया जिसमे साथ ना हो

वो साथ ही कया जिसमे अहसास ना हो

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आज मेरा चाँद उदास है
दुनिया से अनजान
अपने ही ख्यालो में उलझा है
जानती हूँ उसकी उलझन
पर उसे सुलझाना मेरे बसमें नही
मैंने कहा उससे तुम यू उदास न रहा करो
तुम्हारे उदास होने से
आसमान का चाँद भी उदास हो जाता है
तारे टिमटिमाना छोड़ देते है
पूर्णिमा की रात भी अमावस सी लगाती है
और ………
मेरे चाँद ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए पूछा
और ……..और क्या
मैंने कहा
और ……..और इस मुस्कान के चेहरे की मुस्कान भी गायब हो जाती है
वह मुस्कुराया और बोला ………
इस चेहरे की मुस्कान को देखकर ही तो मैं अपने हर गम भूल जाता हूँ
पर मेरी मुस्कान तो तुमसे है
उसने मेरे दिल के ये भाव शायद मेरी आँख में पड़ लिए
तभी तो वह बोला
तुम नही चाहती मैं उदास रहू
तो मैं अब कभी उदास नही रहूँगा
हम दोनों अब मिलकर अपनी हर उलझन का हल ढूढेगे
पर अब कभी इस चेहरे की मुस्कान नही जानी चाहिए
मैंने कहा ………
तुम खुश हो तो इस चेहरे की मुस्कान कभी नही जायेगी

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िकस िकस से बचाए अपना दामन
हर मोड पे लुटने को हजार बैठे है।
पुजी जाती थी कल तक जहाँ
आज वहीं बोली लगाने को तैयार बैठे है।

िजसके िलए छोडी सारी दुिनया
वही उसे बाजार मे सजाए बैठे है।
िजन पे थी सुरकशा की िजममेदारी
वही उसे बेचने को तैयार बैठे है।

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