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मुंबई हमले

उन वीरो को नमन जिन्होंने उन आंतकवादियो से लोहा लेते हुए अपनी जान गवां दी है

मुंबई में ताज ,नरीमन हाउस ,सी एस टी और ओबरोये पर जो आंतकवादी हमले हुए ,वे सिर्फ़ मुम्बई नही ,बल्कि देश की आत्मा पर हुए है । यूँ तो उन आंतकवादियो को मार गिराया गया है। उन पर विजय कर ली है पर कुछ हद तक तो वो अपने खतरनाक इरादों में कामयाब हो ही गए । उन हमलो में लगभग 183 लोगो को अपनी जान गवानी पड़ी ,कितने ही लोग घायल हो गए ।3-4 दिन तक लोग सिर्फ़ ताज में ही बंधक नही बने बल्कि पुरी मुंबई ,पुरा देश उनका बंधक बना रहा।

हमारी सरकार के पास तो लगता है कि हमलो को रोकने कि न कोई नीती है ,और न ही इतना साहस कि वो बार बार हो रहे इन हमलो को रोक सके ।बस हर हमले के बाद बड़ी बड़ी बातें करना उसे आता है। इन हमलो में जिस तरह से विदेशियों को निशाना बनाया गया उससे अन्तरराष्टीय स्तर पर भारत की छवि को भी शती पहुंची है।

अब इन हमलो पर घटिया राजनीति का दौर शुरू हो गया है जो लोकसभा चुनावो तक तो चलेगा। गृहमंत्री जी ने इस्तीफा दे दिया है जो उन्हें बहुत पहले दे देना चाहिए था, वो तो शायद अब भी अपनी कुर्सी से चिपके रहते अगर अगले 6 महीनो में लोकसभा चुनाव न होते तो ।केन्द्र और राज्य सरकार में अगर आज कुछ हलचल हो रही है तो वो भी इसीलिए क्योंकि इस समय बहुत से राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे है और अगले 6 महीनो में लोकसभा चुनाव भी होने है अगर इस समय चुनावो का मौसम न होता तो वो दिल्ली  धमाको की तरह आज भी हाथ पर हाथ धरे बैठी रहती और कोरी बयानबाजी से ही काम चलाती

एक बार फिर नमन उन वीरो को जिन्होंने हमारे लिए अपनी जान गवां दी

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यही तो ज़िन्दगी है

इक सपना टूटा
आँख से आंसू बहा
कुछ देर तक दिल बेचैन रहा
उदास रहा
पर
फिर जैसे
ख़ुद-ब-खुद सब ठीक हो गया
इन आँखों ने फिर इक नया सपना बुना
पहले से भी सुंदर

सपनो का टूटना ,
बिखरना,
जुड़ना ,
टूट कर फ़िर से जुड़ना
यही तो ज़िन्दगी है

ज़िन्दगी

ज़िन्दगी जाने तू क्या चाहती है
जाने किस मोड़ पे मुझे लिए जा रही है
मेरे खवाबो  ,मेरी  तम्मनाओ को
पीछे छोड़ जाने किस और चली जा रही है


जाने कयों तु मेरी हर कोशिश को
नाकाम  करने में  लगी है
मुझसे तेरी जाने  क्या दुश्मनी है
कुछ पल तो मुझे चैन  के लेने दे


तू क्या चाहती है ,मैं नही जानती
पर ख़ुद को तेरी ही धारा में छोड़ कर
मैं बिना कुछ सोच-समझे

तेरी ही रौ में बही जा रही हूँ

शुभकामनाये

आज बहुत दिनों बाद यहाँ आई इतने दिनों तक कुछ लिखा ही नही कुछ लोगो ने मुझे ईमेल

भेजकर मुझसे ये जानना चाहा कि मैं फिर से कब लिखना शुरू कर रही हूँ ,मैं उनको शुक्रिया कहना

चाहूंगी कि वो मुझे लगातार प रहे हैं कुछ ने मुझे दीपावली कि शुभकामनाये भी भेजी पर मैं

किसीको शुभकामनाये नही दे पाई पर शुभकामनाये तो कभी भी दी जा सकती हैं इसलिए मैं अपनी

शुभकामनाये आज दे देती हूँ मेरे  ब्लॉग पर आने वालो को ,मुझे पढने वालो को, मेरी ओर से ढेर सारी शुभकामनाये ओर जो मुझे नही पढते उन्हें भी ढेर सारी  शुभकामनाये

जाने वो पल कहाँ खो गए

ज़िंदगी की भाग-दोड में जाने वो पल कहाँ खो गए


जब कुछ पल बैठ कर चैन से बतिया लिया करते थे


एक चाए के प्याले संग


जाने वो पल कहाँ खो गए


जब सावन की पहली बारिश


तन और मन दोनों को भिगो जाती थी


जाने वो पल कहाँ खो गए


जब कितने ही पल डूबते सूरज को निहारते बीत जाते थे


जब घंटो तक चाँद-तारो की दुनिया मे खोये रहते थे


जाने वो पल कहाँ खो गए


जिसमे बसा था इन्द्रधनुष का हर रंग


हर रंग दूजे से जुदा था


पर फिर भी एक-दूजे से जुडा था


जाने वो पल कहाँ खो गए


जब हर चिंता से मुक्त था जीवन


बस अपनी ही छोटी सी दुनिया में मस्त था जीवन


जाने वो पल कहाँ खो गए

काश लौट कर आ सकते वो पल

आंसू

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कहने को तो पानी का एक कतरा है पर

कितने ही जज्बातों का दरिया है



हर सपने को बड़े प्यार से आँखों में छुपा रखा था

आँख से आंसू बन के बहा जो, वही टुटा हुआ इक सपना है



बिन कहे मेरे दिल के हर जज्बात को बयां कर जाते है

खुशी हो या गम हर दम साथ निभाते है

लाख छुपाना चाहूं मैं

पर ये आंसू चुगली कर जाते है


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हमने उन कि याद में रो रो के टब भर दिए

वो आए और नहा के चल दिए
(ये मेरा लिखा नही है)

नफरत की आग

फ़िर से लग गई है दुकाने
फ़िर से सज गए है बाज़ार
दिल्ली फ़िर अपनी रफ़्तार से चल पड़ी है
धमाके के मंजर को भूल ज़िन्दगी फ़िर पटरी पे आ गई है
पर वो कैसे भूल पायेंगे ……..
जिसके घर के चिराग इस नफरत की आग में जल गए
वो कैसे भूल पायेंगे ……………
जिसने अपने जिस्म पे उन घावो को झेला है
वो कैसे भूल पायेंगे …………
जिसने हँसते-मुस्कुराते लोगो को चीथडो में तब्दील होता देखा है
जल कर मर गए जो इस आग में
उनकी ज़िन्दगी की कीमत लगा कर ,
उनका मुआवजा तो दे दिया जायेगा
पर जो जिंदगियां जीते जी मर गई ,उनका मुआवजा कौन देगा
उस बच्चे के सवालो का जवाब कौन देगा …….
जो बार -बार अपने पापा के लिए रो रहा है
उस पिता के सवालो का जवाब कौन देगा ………
जिसने अपने जवान बेटे को खो दिया है
उस राष्ट्र को जवाब कौन देगा ……….
जिसका एक घाव भरता नही है की उसके सीने में कोई और चोट कर दी जाती है
कौन देगा इन सवालों का जवाब ………..कौन ?