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Posts Tagged ‘आग’

कल्पना की लकीरों से, तेरी एक तस्वीर बनाई है
जब भी देखती हूँ उसमे, तेरा ही अक्स नज़र आता है
किसी का उदास चेहरा उस, अजनबी फ़रिश्ते से देखा नही जाता
किसी कि भी आँखों में आंसू देख ,मदद को दोडा वो आता है


हर तरफ़ आग ही आग, मचा हाहाकार है
ऐसे माहौल में तू ,कैसे आराम फरमाता है
कल जब ये आग, तेरे घर तक पहुंच जायेगी
तब ही शायद जलन की पीड़ा को जान पायेगा


एक दिन  वो रब, सब ठीक कर देगा
ऐसी बातें कह कर तू, क्यों ख़ुद को बरगलाता  है
ख़ुद- ब -ख़ुद कुछ भी ठीक नही होता है
उस रब ने ये काम हमारे ही जिम्मे  छोडा है


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फ़िर से लग गई है दुकाने
फ़िर से सज गए है बाज़ार
दिल्ली फ़िर अपनी रफ़्तार से चल पड़ी है
धमाके के मंजर को भूल ज़िन्दगी फ़िर पटरी पे आ गई है
पर वो कैसे भूल पायेंगे ……..
जिसके घर के चिराग इस नफरत की आग में जल गए
वो कैसे भूल पायेंगे ……………
जिसने अपने जिस्म पे उन घावो को झेला है
वो कैसे भूल पायेंगे …………
जिसने हँसते-मुस्कुराते लोगो को चीथडो में तब्दील होता देखा है
जल कर मर गए जो इस आग में
उनकी ज़िन्दगी की कीमत लगा कर ,
उनका मुआवजा तो दे दिया जायेगा
पर जो जिंदगियां जीते जी मर गई ,उनका मुआवजा कौन देगा
उस बच्चे के सवालो का जवाब कौन देगा …….
जो बार -बार अपने पापा के लिए रो रहा है
उस पिता के सवालो का जवाब कौन देगा ………
जिसने अपने जवान बेटे को खो दिया है
उस राष्ट्र को जवाब कौन देगा ……….
जिसका एक घाव भरता नही है की उसके सीने में कोई और चोट कर दी जाती है
कौन देगा इन सवालों का जवाब ………..कौन ?

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