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Posts Tagged ‘कटी पतंग’

ना जा उनके मुहलले मे उनकी गिलयाँ तंग हो गई है
छोड के अपनी जमीं वो भी हमारे संग हो गई है

इधर उधर नजरे ना जाने कया ढूढँती है
तुमहे सामने पा के ये दंग हो गई है

आसमान पे सतरंगी सपनो की घटाएँ छाई है
लगता है जैसे सारी दुिनया एकरंग हो गई है

बन िततली खुले गगन मे वो उड जाएँगी
कह दो जमाने को वो कटी पतंग हो गई है

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