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Posts Tagged ‘घर’

फ़िर से लग गई है दुकाने
फ़िर से सज गए है बाज़ार
दिल्ली फ़िर अपनी रफ़्तार से चल पड़ी है
धमाके के मंजर को भूल ज़िन्दगी फ़िर पटरी पे आ गई है
पर वो कैसे भूल पायेंगे ……..
जिसके घर के चिराग इस नफरत की आग में जल गए
वो कैसे भूल पायेंगे ……………
जिसने अपने जिस्म पे उन घावो को झेला है
वो कैसे भूल पायेंगे …………
जिसने हँसते-मुस्कुराते लोगो को चीथडो में तब्दील होता देखा है
जल कर मर गए जो इस आग में
उनकी ज़िन्दगी की कीमत लगा कर ,
उनका मुआवजा तो दे दिया जायेगा
पर जो जिंदगियां जीते जी मर गई ,उनका मुआवजा कौन देगा
उस बच्चे के सवालो का जवाब कौन देगा …….
जो बार -बार अपने पापा के लिए रो रहा है
उस पिता के सवालो का जवाब कौन देगा ………
जिसने अपने जवान बेटे को खो दिया है
उस राष्ट्र को जवाब कौन देगा ……….
जिसका एक घाव भरता नही है की उसके सीने में कोई और चोट कर दी जाती है
कौन देगा इन सवालों का जवाब ………..कौन ?

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आज बहुत दिनों बाद कुछ लिखने बैठी हूँ ।घर में तोड़ फोड़ ,साफ सफाई का काम हो रहा था ,इस कारण कंप्यूटर को कुछ दिनों के लिए बंद क्र रखा था । बचपन में तो जब भी घर में रंग रोगन का काम होता था , तो बहुत मजा आता था । सारे घर का सामान इधर से उधर होता था तो उस सामान में बहुत सारी चीजे अपने मतलब की भी मिल जाती थी ।आज भी बहुत कुछ मिला कुछ पुरानी यादें ,पुरानी तस्वीरे और कुछ पन्ने जिन पे मेरी कुछ पुरानी कविताये थी । अपनी पुरानी कवितायों में से एक कविता मैं अपनी अगली पोस्ट में डालूंगी ।

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