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Posts Tagged ‘दिल’

अपने जब दूर जाते है


तो


बहुत दर्द देते है


पर


अपने जब पास रह कर


भी


दूरिया बना लेते है


तो


दिल में एक कसक


छोड़ जाते है



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इक सपना टूटा
आँख से आंसू बहा
कुछ देर तक दिल बेचैन रहा
उदास रहा
पर
फिर जैसे
ख़ुद-ब-खुद सब ठीक हो गया
इन आँखों ने फिर इक नया सपना बुना
पहले से भी सुंदर

सपनो का टूटना ,
बिखरना,
जुड़ना ,
टूट कर फ़िर से जुड़ना
यही तो ज़िन्दगी है

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कहने को तो पानी का एक कतरा है पर

कितने ही जज्बातों का दरिया है



हर सपने को बड़े प्यार से आँखों में छुपा रखा था

आँख से आंसू बन के बहा जो, वही टुटा हुआ इक सपना है



बिन कहे मेरे दिल के हर जज्बात को बयां कर जाते है

खुशी हो या गम हर दम साथ निभाते है

लाख छुपाना चाहूं मैं

पर ये आंसू चुगली कर जाते है


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हमने उन कि याद में रो रो के टब भर दिए

वो आए और नहा के चल दिए
(ये मेरा लिखा नही है)

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कभी कभी ये सोचती हूँ कि
क्या आंतकवादी इंसान नही होते
अगर होते है तो
क्यों उनकी आत्मा उन्हें धिक्कारती  नही है……….जब वो निर्दोषों का लहू बहाते है
क्यों उनकी आत्मा उनसे ये नही पूछती कि ………. वो मासूम जिंदगियों को क्यों तबाह कर रहे है
सड़क पे पड़े मांस के चीथडो को देखके भी वो कैसे चैन से सो पाते है
कहीं उनके शरीर में दिल की जगह पत्थर तो नही है
हाँ ,ऐसा ही होगा
तभी तो किसी की चीखो से उनका दिल नही पसीजता
ऐसा ही है
तभी तो किसी की बर्बादी में उन्हें अपना मकसद पूरा होता दिखता है
शायद उनके पास दिमाग भी नही होता ……….
तभी वो ये नही समझ पाते आख़िर वो क्या कर रहे है
जो आग आज वो दूसरो के घर में लगा रहे है
उससे वो भी नही बच पाएंगे
हाँ ,शायद वो इंसान नही होते ……………
जिसके पास दिल,दिमाग और आत्मा ना हो वो इंसान हो भी कैसे सकता है

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वो फूल ही कया जिसमे खुशबू ना हो

वो दिल ही कया जिसमे किसी का पयार न हो

वो पयार ही कया जिसमे दरद ना हो

वो दरद ही कया जिसमे साथ ना हो

वो साथ ही कया जिसमे अहसास ना हो

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मेरे होठो की मुस्कान देखकर
गर वो समझते है की मैं खुश हूँ
तो उन्हें इसी
गलतफहमी मे खुश होने दो 

कल उजड़ जाएगा मेरा ये आशिअना
जाने फ़िर कहाँ बसेरा पाऊँगी
कम से कम आज की रात
तो मुझे चैन से सोने दो 

दिल का गुबार आंखो से
आंसू बन बह निकला है
कोई न रोको इसे
आज जी भर के रोने दो 

जा रही हूँ आज ,तेरी
छाँव  के बिना कैसे रह पाऊँगी
लौट के फिर आने के लिए
आज मुझे जाने दो

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