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Posts Tagged ‘hindi poetry’

अपने जब दूर जाते है


तो


बहुत दर्द देते है


पर


अपने जब पास रह कर


भी


दूरिया बना लेते है


तो


दिल में एक कसक


छोड़ जाते है



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कल्पना की लकीरों से, तेरी एक तस्वीर बनाई है
जब भी देखती हूँ उसमे, तेरा ही अक्स नज़र आता है
किसी का उदास चेहरा उस, अजनबी फ़रिश्ते से देखा नही जाता
किसी कि भी आँखों में आंसू देख ,मदद को दोडा वो आता है


हर तरफ़ आग ही आग, मचा हाहाकार है
ऐसे माहौल में तू ,कैसे आराम फरमाता है
कल जब ये आग, तेरे घर तक पहुंच जायेगी
तब ही शायद जलन की पीड़ा को जान पायेगा


एक दिन  वो रब, सब ठीक कर देगा
ऐसी बातें कह कर तू, क्यों ख़ुद को बरगलाता  है
ख़ुद- ब -ख़ुद कुछ भी ठीक नही होता है
उस रब ने ये काम हमारे ही जिम्मे  छोडा है


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वो वक्त जैसे बीत कर भी नही बिता

मेरे आज में शामिल है वो कुछ इस तरह



कहते है वक्त से पहले किसी को कुछ नही मिलता

जाने वो वक्त कब आएगा

उस वक्त के इंतज़ार में तो उमर गुजर गई



वक्त इंसान को क्या से क्या बना देता है

कल तक जो नही देते थे जवाब

आज वो पूछते है हाल

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तन्हाई  की ऐसी आदत  हो गई है


कि महफ़िल  से डर लगता है


किसी के जाने  से तो  कभी ना डरे


पर किसी के आने की आहट से भी डर लगता है

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तु कया लूटेगा उन लूटे हूओ को
जो पहले ही वकत के हाथो लूटे है ।

तोड़ सकी जिस ना मुश्किलें हजार
आज वो अपनों के हाथो ही टूटे है ।

कब तक हर दुःख को अपने दामन मे समेटू
आज ये दामन मुझसे छूटे है ।

ये रिश्ते ही थे मेरा सारा संसार
आज इस संसार मे मेरा दम घुटे है ।

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ना जा उनके मुहलले मे उनकी गिलयाँ तंग हो गई है
छोड के अपनी जमीं वो भी हमारे संग हो गई है

इधर उधर नजरे ना जाने कया ढूढँती है
तुमहे सामने पा के ये दंग हो गई है

आसमान पे सतरंगी सपनो की घटाएँ छाई है
लगता है जैसे सारी दुिनया एकरंग हो गई है

बन िततली खुले गगन मे वो उड जाएँगी
कह दो जमाने को वो कटी पतंग हो गई है

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चोखट पर नजरे लगाए बैठे थे, इंतज़ार मे नजरे बिछाये बैठे थे
दरवाजे पर कोई दस्तक हुई , पर क्या ये तुम हो ।

सपनों मे रोज़ मिलते थे तुमसे ,दूर जाकर भी तुम दूर हो न पाए
दर पर मेरे खड़ा है कोई ,पर क्या यह तुम हो ।

नजर आती है चिथडो मे लिपटी काया , मुख पर सलवटे हजार
तुम तो ऐसे न थे ,पर क्या यह तुम हो ।

बरसों न जाने कहां रहे ,इक बार मेरी सुध तक न ली
मेरी सुध लेने आया हैं जो ,पर क्या ये तुम हो ।

छोड़ गए थे मुझे ,जाने किस आसरे
लौट कर आए जो तुम ,पर क्या ये तुम हो ।

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